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वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 विधेयक आज यानी बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा. ऑल इंडिया मु्स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बिल का विरोध कर रहा है. बोर्ड के महासचिव अब्दुल रहीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ये बिल पहले से ज्यादा आपत्तिजनक हो गया है. इसे एक प्लानिंग के साथ लाया गया है. 5 करोड़ विरोध में ईमेल आए. किसी पर भी विचार नहीं किया गया.

अब्दुल रहीम ने बुधवार को कहा, आज वक्फ बिल संसद में पेश किया जा रहा है. एक प्लानिंग के साथ ये बिल लाया गया है. जेपीसी ने भी विरोध दर्ज किया. विरोध में 5 करोड़ ईमेल आए. किसी पर भी विचार नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अब ये बिल पहले से ज्यादा आपत्तिजनक हो गया है. अब CEO के पद पर मुसलमान नहीं होगा. वक्फ का इंतजाम अब मुस्लिमों के हाथों से लेकर सरकार के हाथों सौंप दिया गया है. लॉ बोर्ड ने ये भी कहा कि अगर बिल पार्लियामेंट में पास हुआ तो हम चुप नहीं बैठेंगे. देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे.

लॉ बोर्ड की पार्टियों से अपील

इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मंगलवार को बीजेपी के सहयोगी दलों समेत सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों और सांसदों से अपील की कि वे वक्फ विधेयक का कड़ा विरोध करें और किसी भी हालत में इसके पक्ष में मतदान न करें.

उन्होंने एक बयान में कहा कि यह विधेयक न केवल भेदभाव और अन्याय पर आधारित है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के भी खिलाफ है. रहमानी ने आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए बीजेपी का लक्ष्य वक्फ कानूनों को कमजोर करना और वक्फ संपत्तियों को जब्त करने और नष्ट करने का रास्ता तैयार करना है.

उन्होंने कहा, उपासना स्थल अधिनियम के अस्तित्व में होने के बावजूद, हर मस्जिद में मंदिर खोजने का मुद्दा लगातार बढ़ रहा है. यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी नाजायज दावों में वृद्धि होगी, जिससे कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के लिए उन्हें जब्त करना आसान हो जाएगा.

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